शासनादेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाता नौतनवा मनरेगा एपीओ की तैनाती

शासनादेश की खुलेआम धज्जियां उड़ाता नौतनवा मनरेगा एपीओ की तैनाती



18 साल से एक ही कुर्सी, सवालों के घेरे में प्रशासन और जिले के आला अधिकारी

महराजगंज जनपद में बीते 18 वर्षों के दौरान जिलाधिकारी से लेकर सीडीओ तक की कुर्सियाँ कई बार बदलीं, लेकिन नौतनवा ब्लॉक में तैनात मनरेगा एपीओ शशिकांत की कुर्सी आज भी अडिग बनी हुई है। शासनादेश स्पष्ट है कि मनरेगा एपीओ का स्थानांतरण प्रत्येक 3 से 5 वर्ष में अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए, फिर भी यह अधिकारी बीते 18 वर्षों से एक ही ब्लॉक में जमे हुए हैं।

सूत्रों की मानें तो पूरे कार्यकाल में मात्र 6 महीने के लिए इन्हें बृजमनगंज ब्लॉक भेजा गया था, लेकिन वहां कमीशनबाजी को लेकर विवाद खड़ा होते ही इन्हें पुनः नौतनवा ब्लॉक वापस ले आया गया। इसके बाद से नौतनवा ब्लॉक को यह अधिकारी अपनी निजी जागीर समझकर राजभोग करते रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिले का कोई भी बड़ा अधिकारी आज तक इन्हें नौतनवा से हटाने का साहस नहीं कर सका। जानकारों का कहना है कि जो भी अधिकारी इनका तबादला करने की कोशिश करता है, उससे पहले उसी अधिकारी का स्थानांतरण हो जाता है। यह स्थिति जिले में प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि एक गहरे राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करती है। जहां एक ओर महाराजगंज जिले में कार्यरत अन्य सभी मनरेगा एपीओ का नियमानुसार 3 से 5 वर्षों के भीतर स्थानांतरण होता रहा है, वहीं नौतनवा ब्लॉक इस नियम से आज तक अछूता क्यों है यह सवाल अब जनता के बीच गूंजने लगा है। अब देखना यह होगा कि इस समाचार के प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन और शासन स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या फिर पहले की तरह कुर्सियों से चिपके हुए “बिके हुए अधिकारी” एक बार फिर आंखें मूंदे बैठे रहेंगे।

सवाल साफ है

क्या शासनादेश सिर्फ कागजों के लिए हैं, या नौतनवा ब्लॉक में इनका कोई मतलब ही नहीं?

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